गुजरात के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थी: छात्रावास का भोजन बिल और पहले साल का उपकरण अनुदान २०२६-२७, अंतिम तिथि ३० नवंबर
गुजरात के आदिजाति विकास विभाग के दो अनुदान, जो पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के साथ-साथ चलते हैं। दोनों उन अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए जिनकी पारिवारिक आय सालाना ₹६.०० लाख से कम है। VKY-१५७ कॉलेज से जुड़े छात्रावास में रहने पर भोजन के लिए ₹१,५०० महीना, १० महीने तक देता है। VKY १६४ मेडिकल, इंजीनियरिंग या डिप्लोमा के पहले साल में उपकरणों के लिए ₹१५,०००, ₹१०,००० या ₹५,००० देता है। आवेदन ३० नवंबर २०२६ तक।
स्कॉलरशिप की जानकारी
कौन आवेदन कर सकता है · पात्रता
✔आईटीआई या डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर
✔अनुसूचित जनजाति
✔गुजरात
✔पारिवारिक आय ₹६ लाख
📅 ज़रूरी तारीख़ें
आवेदन से पहले
ये दो अलग-अलग अनुदान हैं, और इनमें से कोई भी पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति नहीं है। ये आदिजाति विकास विभाग की उसी अधिसूचना में हैं और आवेदन की वही समय-सीमा साझा करते हैं, लेकिन ये अपनी अलग योजनाएँ हैं, अपने नियमों के साथ — और सबसे बड़ी बात, इनकी आय-सीमा उस पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से कहीं ऊँची है जिसके लिए ज़्यादातर अनुसूचित जनजाति विद्यार्थी आवेदन करते हैं। आवेदन १ सितंबर २०२६ को खुले और ३० नवंबर २०२६ को बंद होंगे।
दोनों में आय की एक ही कसौटी है: पारिवारिक आय सालाना ₹६.०० लाख से कम। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि मुख्य पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की केंद्रीय राह ₹२.५० लाख पर ही कट जाती है। सालाना ₹४ लाख कमाने वाला परिवार उस रेखा से ऊपर है और मान बैठता है कि यहाँ उसके लिए कुछ नहीं। ये दोनों अनुदान उसी के लिए हैं।
VKY-१५७: कॉलेज से जुड़े छात्रावासों में भोजन बिल सहायता
- आपकी सालाना पारिवारिक आय ₹६.०० लाख से कम होनी चाहिए
- आप पढ़ाई के दौरान कॉलेज से जुड़े छात्रावास में रह रहे हों
- आपको भोजन बिल के लिए ₹१,५०० महीना, १० महीने तक मिलता है
बारह की जगह दस महीने इसलिए कि यही शैक्षणिक वर्ष है, यानी पूरे साल की पढ़ाई पर यह अनुदान ₹१५,००० बैठता है।
VKY १६४: पहले साल के विद्यार्थियों के लिए उपकरण सहायता
- आपकी सालाना पारिवारिक आय ₹६.०० लाख से कम होनी चाहिए
- आप मेडिकल, इंजीनियरिंग या डिप्लोमा पाठ्यक्रम के पहले साल में हों
- यह अनुदान आपके पाठ्यक्रम के लिए ज़रूरी उपकरण ख़रीदने के वास्ते है
रक़म पूरी तरह इस पर निर्भर करती है कि आप किस पाठ्यक्रम में हैं:
| आपका पाठ्यक्रम | एकमुश्त अनुदान |
|---|---|
| मेडिकल | ₹१५,००० |
| इंजीनियरिंग | ₹१०,००० |
| डिप्लोमा | ₹५,००० |
यह सिर्फ़ पहले साल का अनुदान है। अधिसूचना इसे उन्हीं विद्यार्थियों तक सीमित रखती है जो इन पाठ्यक्रमों के पहले साल में पढ़ रहे हैं, इसलिए अभी चूक गए तो डिग्री के बाद के सालों में इसे नहीं माँगा जा सकता। अगर आप इस साल गुजरात में मेडिकल, इंजीनियरिंग या डिप्लोमा के पहले साल में हैं और आपके परिवार की आय ₹६.०० लाख से कम है, तो आवेदन का साल यही है।
आवेदन कहाँ और कैसे करना है, वह छात्रवृत्ति जैसा ही है। gssp.gujarat.gov.in पर जाइए, Login/Register में Citizen Login चुनिए, और पहले पंजीकरण न किया हो तो मोबाइल नंबर तथा ई-मेल से कर लीजिए। digitalgujarat.gov.in से भी हो जाता है: Services, फिर Scholarship Services, फिर Request a New Service। जिन योजनाओं में आवेदन अब भी लिए जा रहे हैं वे हरे रंग में दिखती हैं, बंद हो चुकी लाल रंग में। फ़ॉर्म Registration Detail, Bank Details, अकादमिक Details, Disability Detail और Attachment से होकर गुज़रता है, फिर Verify Mobile Number और Confirm and Final Submit।
वे नियम जिनसे तय होता है कि पैसा आप तक पहुँचेगा या नहीं।
- आपका बैंक खाता आधार से सीडेड, डीबीटी-enabled, और न बंद हो न निष्क्रिय होना चाहिए। इसे npci.org.in पर Customer, फिर Bharat Aadhaar Seeding Enabler (BASE), फिर Aadhaar Mapped Status में देखिए।
- एक आधार नंबर पर एक ही आवेदन।
- अगर आप छात्रावास में हैं — और भोजन बिल अनुदान का आधार ही यही है — तो आपको उस छात्रावास के सक्षम अधिकारी से प्रमाणित हॉस्टेलर प्रमाणपत्र चाहिए।
- अगर आप गुजरात से बाहर पढ़ते हैं, तो अकेला ऑनलाइन आवेदन काफ़ी नहीं। आपकी संस्था से प्रमाणित दस्तावेज़ आपके ज़िला कार्यालय तक भी पहुँचने चाहिए।
विभाग की अपनी आख़िरी सलाह यहाँ भी लागू होती है: अंतिम तिथि का इंतज़ार मत कीजिए।
५ सितंबर २०२६ को गुजरात राज्य छात्रवृत्ति पोर्टल और आदिजाति विकास विभाग के अपने २०२६-२७ पोस्ट-मैट्रिक मार्गदर्शक दस्तावेज़ पर जाँचा गया, जिसका लिंक पोर्टल पर ही है। गुजरात हर साल इन योजनाओं में बदलाव करता है, इसलिए आवेदन से पहले ऊपर दिया आधिकारिक पेज ज़रूर खोलिए।
हर अंतिम तिथि हम उसके आधिकारिक स्रोत पर दोबारा जाँचते हैं। तारीख़ बदली, तो यह पेज भी बदलेगा। हम हर तारीख़ कैसे जाँचते हैं।
प्रकाशित ५ सितंबर २०२६.